श्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती – शेषाचल अवतार तारक तूं देवा
शेषाचल अवतार तारक तूं देवा – भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की पारंपरिक मराठी आरती का पाठ।
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अंतिम जाँच:
- रचयिता और परंपरा
पारंपरिक पाठ।
- कब पढ़ा जाता है
महाराष्ट्र में बालाजी की पूजा, शनिवार और नवरात्रि के व्यंकटेश उत्सव में यह आरती गाई जाती है।
इस पाठ के बारे में
यह तिरुमला के भगवान वेंकटेश (बालाजी) की पारंपरिक मराठी आरती है, जिसमें उन्हें शेषाचल पर अवतरित, कमलारमण और करुणासिंधु कहकर पुकारा गया है।
पाठ
शेषाचल अवतार तारक तूं देवा ।
सुरवरमुनिवर भावें करिती जन सेवा ॥
कमळारमणा अससी अगणित गुण ठेवा ।
कमळाक्षा मज रक्षुनि सत्वर वर द्यावा ॥ १ ॥अर्थ
हे देव, आप शेषाचल पर अवतरित होकर तारने वाले हैं; श्रेष्ठ देवता, मुनि और भक्त भाव से आपकी सेवा करते हैं। हे कमला-रमण, आप अनगिनत गुणों के भंडार हैं; हे कमलनयन, मेरी रक्षा करके शीघ्र वर दीजिए।
जय देव जय देव जय व्यंकटेशा ।
केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा ॥ धृ ॥अर्थ
हे व्यंकटेश, आपकी जय हो। आरती के अनुसार आप करुणा के सागर हैं और आशा पूरी करते हैं।
हें निजवैकुंठ म्हणुनि ध्यातों मी तूतें ।
दाखविसी गुण कैसे सकळिक लोकाते ॥
देखुनि तुझें स्वरूप सुख अद्भुत होतें।
ध्यातां तुजला श्रीपति दृढ मानस होतें ॥ जय ॥ २ ॥अर्थ
इसे ही अपना वैकुंठ मानकर मैं आपका ध्यान करता हूँ; आप सब लोगों को अपने गुण कैसे दिखाते हैं! आपका स्वरूप देखकर अद्भुत सुख होता है, और हे श्रीपति, आपका ध्यान करने से मन दृढ़ होता है।
इस पाठ के बारे में
सार्वजनिक (कॉपीराइट से मुक्त): पारंपरिक पाठ (पारंपरिक)।
पारंपरिक पाठ वैसा ही दिया गया है जैसा प्रचलित छपे संस्करणों में मिलता है। इस पेज का हर अर्थ हमने अपने शब्दों में लिखा है।
